M-VDCS (बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समितियों) के Ideal Bylaws Download करे: संपूर्ण मार्गदर्शिका, नियम एवं उद्देश्य

ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और दुग्ध उत्पादन व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में भारत सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा निरंतर ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में, सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा  बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समितियों M-VDCS (Multipurpose Village Dairy Cooperative Societies) के गठन और संचालन हेतु नई आदर्श उपविधियां (Model Bylaws) तैयार की गई हैं।

राजस्थान सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 तथा नियम, 2003 के अंतर्गत इन आदर्श उपविधियों को विधिवत जारी कर दिया गया है। यदि आप एक नई डेयरी सहकारी समिति पंजीकृत कराना चाहते हैं, अपनी पुरानी समिति को बहुउद्देशीय मॉडल में बदलना चाहते हैं, या इसके नियमों का अध्ययन करना चाहते हैं, तो आप इस लेख के माध्यम से बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समितियों (M-VDCS) के Ideal Bylaws Download करे और इसके सभी तकनीकी, वित्तीय एवं प्रबंधकीय प्रावधानों को विस्तार से समझें।

बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समिति (M-VDCS) क्या है?

अब तक ग्रामीण स्तर पर कार्य करने वाली प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियां केवल दूध एकत्र करने और उसे जिला दुग्ध संघ को भेजने तक सीमित थीं। लेकिन भारत सरकार के “सहकार से समृद्धि” विजन के तहत इन्हें अब बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समिति (M-VDCS) के रूप में पुनर्गठित किया गया है।

अब यह समितियां सिर्फ दुग्ध संकलन तक सीमित न रहकर गाँव के आर्थिक और सामाजिक विकास का एक संपूर्ण केंद्र बनेंगी। इनके माध्यम से पशुपालन, उन्नत कृषि इनपुट्स, बैंकिंग व डिजिटल सेवाएं (CSC), खाद-बीज वितरण, कोल्ड स्टोरेज, और यहाँ तक कि हरित ऊर्जा व गैस/पेट्रोल वितरण जैसी सुविधाएं भी ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी।

M-VDCS के प्रमुख उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र (Scope of Activities)

आदर्श उपविधियों के अध्याय-III के अनुसार, M-VDCS को अत्यंत व्यापक अधिकार और कार्यक्षेत्र प्रदान किए गए हैं:

क. दुग्ध उत्पादन एवं पशु स्वास्थ्य संवर्धन

  • स्वच्छ, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण दूध का वैज्ञानिक संकलन व प्रापण।
  • कृत्रिम गर्भाधान, उत्तम नस्ल सुधार, हरा चारा, साइलेज तथा संतुलित पशु आहार (कैटल फीड) की व्यवस्था।
  • पशु चिकित्सा शिविर, आवश्यक दवाइयां, और टीकाकरण सेवाएं ग्राम स्तर पर उपलब्ध कराना।

ख. कृषि और संबद्ध उद्यमों का विस्तार

  • प्रमाणित उन्नत बीज, जैविक एवं रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, फफूंदनाशक, जैव-नियंत्रक और आधुनिक कृषि यंत्रों का व्यापार।
  • बागवानी, मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, मत्स्य पालन तथा कुक्कुट पालन को बढ़ावा देना।
  • उपज भंडारण हेतु गोदाम (Warehouses) और सौर ऊर्जा आधारित कोल्ड स्टोरेज का विकास करना।

ग. नागरिक एवं डिजिटल सेवाएं (CSC)

  • समिति परिसर में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालित कर ग्रामीणों को सभी ऑनलाइन सरकारी सेवाएं, प्रमाण पत्र, और डीबीटी (DBT) की सुविधा देना।
  • किराना व उपभोक्ता भंडार, एलपीजी गैस एजेंसी वितरण और पेट्रोल/डीजल पंप की स्थापना (सक्षम प्राधिकारियों से लाइसेंस के अधीन)।

घ. वित्तीय समावेशन एवं सामाजिक सुरक्षा

  • दुधारू पशु बीमा, फसल बीमा, स्वास्थ्य व जीवन बीमा जैसी माइक्रो-इंश्योरेंस सेवाएं प्रदान करना।
  • सदस्यों के बीच बचत, मितव्ययता और स्वयं सहायता की भावना को प्रोत्साहित करना।
  • सौर ऊर्जा (Solar), बायो-गैस, और स्वच्छ हरित ऊर्जा परियोजनाओं को ग्रामीण स्तर पर लागू करना।
M-VDCS के मुख्य कार्य एवं बहुउद्देशीय सेवाएं

M-VDCS –पूंजी संरचना एवं वित्तीय संसाधन (Capital & Funds)

उपविधियों के अध्याय-IV के अनुसार समिति की पूंजी व्यवस्था पारदर्शी एवं सुदृढ़ रखी गई है:

मद / विवरणनिर्धारित नियम एवं सीमा
प्रवेश शुल्क (Entrance Fee)मात्र ₹10/- (अप्रतिदेय / Non-refundable)
अधिकृत शेयर पूंजी₹50,000/- (साधारण सभा द्वारा आवश्यकतानुसार बढ़ाई जा सकती है)
प्रत्येक शेयर का अंकित मूल्य₹100/- प्रति शेयर (आवेदन के साथ देय)
व्यक्तिगत शेयर सीमापहले वर्ष कुल शेयर पूंजी का अधिकतम 10%, बाद में 20% तक
उधार सीमा (Borrowing Limit)चुकता पूंजी, संचित आरक्षित व भवन निधि में से हानि घटाने के बाद शुद्ध राशि का अधिकतम 10 गुना
पशु क्रय ऋण सहायताजिला दुग्ध संघ के माध्यम से प्रति सदस्य अधिकतम 10 दुधारू पशु (एक वर्ष में अधिकतम 3 पशु)

समिति अपने सदस्यों से बचत जमाराशियां भी स्वीकार कर सकती है, जिस पर केंद्रीय सहकारी बैंक की बचत खाता दर के अनुसार वार्षिक ब्याज देय होगा।

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M-VDCS – सदस्यता की पात्रता, अधिकार और कर्तव्य

आदर्श उपविधियों के अध्याय-V के अंतर्गत किसी भी ग्रामवासी के लिए समिति की सदस्यता के स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं:

M-VDCS सदस्यता की न्यूनतम पात्रता:

  1. आवेदक समिति के कार्यक्षेत्र (राजस्व ग्राम पंचायत) का निवासी हो तथा न्यूनतम 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  2. दुग्ध उत्पादक सदस्य: उसके पास स्वयं का दुधारू पशु हो, उसने वर्ष में कम से कम 180 दिन और न्यूनतम 300 लीटर दूध समिति को दिया हो (फ्लश टू लीन अनुपात 3:1)।
  3. (विशेष छूट: नवगठित सोसाइटियों के मामले में दुग्ध आपूर्ति का यह न्यूनतम मानदंड पंजीकरण के 2 वर्ष बाद लागू होगा)।
  4. कृषि व संबद्ध गतिविधियों के सदस्य: जो मत्स्य, कुक्कुट, भेड़-बकरी, मधुमक्खी पालन या कृषि से जुड़े हैं, उनके लिए समिति के साथ न्यूनतम ₹1,000/- का वार्षिक कारोबार अथवा 100 किलोग्राम/इकाई का व्यापार अनिवार्य है।
  5. एक परिवार (कुटुम्ब) से केवल एक ही व्यक्ति समिति का सदस्य बन सकता है।
  6. व्यक्ति किसी अन्य प्रतिस्पर्धी निजी दूध व्यापार या डेयरी व्यवसाय में संलिप्त न हो।

सक्रिय सदस्य (Active Member) बनाम निष्क्रिय सदस्य:

  • सक्रिय सदस्य: जिसने वित्तीय वर्ष में 180 दिन दूध आपूर्ति (300 लीटर) की हो और पिछले 3 वित्तीय वर्षों में कम से कम एक साधारण सभा में भाग लिया हो।
  • केवल सक्रिय सदस्यों को ही प्रबंध समिति का चुनाव लड़ने, मतदान करने और लाभांश/बोनस प्राप्त करने का पूर्ण विधिक अधिकार प्राप्त होगा।

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 प्रबंध समिति (Managing Committee) का गठन एवं शक्तियां

समिति के दिन-प्रतिदिन के नीति-निर्धारण और प्रबंधन के लिए 5 वर्ष के कार्यकाल वाली प्रबंध समिति गठित की जाएगी:
आरक्षण व्यवस्था (Mandatory Reservation)

प्रबंध समिति के कुल 12 निर्वाचित पदों में सामाजिक संतुलन सुनिश्चित किया गया है:

  • अनुसूचित जाति (SC): 1 पद आरक्षित
  • अनुसूचित जनजाति (ST): 1 पद आरक्षित
  • महिला वर्ग: 2 पद आरक्षित
  • विशेषज्ञ सदस्य: बैंकिंग, वित्त या डेयरी क्षेत्र के 2 विशेषज्ञों को सहयोजित (Co-opt) किया जा सकता है (इन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा)।

कोरम एवं बैठकें

प्रबंध समिति की बैठक प्रति तीन माह में कम से कम एक बार आयोजित करना अनिवार्य है।

बैठक का कोरम (गणपूर्ति) कुल सदस्यों का 50% या न्यूनतम 7 सदस्य (जो भी अधिक हो) होना आवश्यक है।

M-VDCS प्रबंध समिति की संरचना एवं कार्यप्रणाली

लाभ का वितरण एवं विभिन्न आरक्षित कोष (Net Profit Distribution)

सहकारी सिद्धांतों के अनुरूप, M-VDCS के वार्षिक शुद्ध लाभ (Net Profit) को पारदर्शी तरीके से सदस्यों और विकास कार्यों में विभाजित किया जाएगा (अध्याय-X):

  1. आरक्षित निधि (Reserve Fund): शुद्ध लाभ का न्यूनतम 25% आरक्षित कोष में जमा किया जाएगा।
  2. शेयर लाभांश (Dividend): अंशधारकों को उनके शेयर पर अधिकतम 10% तक लाभांश दिया जा सकेगा।
  3. सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण कोष: अधिनियम की धारा 48 के तहत 1% अंशदान।
  4. सहकारिता नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कोष: क्रमशः 3% एवं 2%।

कटौतियों के बाद शेष शुद्ध लाभ का आवंटन:

  • 25% राशि सदस्यों को उनके द्वारा किए गए दुग्ध/व्यापार संरक्षण के अनुपात में बोनस के रूप में वितरित होगी।
  • 10% पशु विकास कोष (Cattle Development Fund) में।
  • 10% समिति कर्मचारियों के बोनस हेतु (अधिकतम 2 माह के वेतन की सीमा तक)।
  • 10% सार्वजनिक कल्याण कोष में।
  • 5% सहकारी प्रचार कोष में।
  • शेष बची हुई समस्त राशि भवन निर्माण कोष में जमा होगी।

पारदर्शी संचालन, डिजिटल भुगतान और आंतरिक नियंत्रण

समिति में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी रोकने के लिए आदर्श उपविधियों में कड़े प्रावधान किए गए हैं:

  • डिजिटल भुगतान (DBT): किसानों द्वारा आपूर्ति किए गए दूध का भुगतान 10 दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक खाते में डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर किया जाएगा।
  • कैश-इन-हैंड सीमा: समिति के पास दैनिक क्रय किए गए दूध के औसत मूल्य के 4 गुना (और यदि प्रतिदिन भुगतान होता है तो 2 गुना) से अधिक नकदी रखने पर रोक है।
  • वार्षिक सांविधिक ऑडिट: वित्तीय वर्ष समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर लेखा विवरणी तैयार कर 6 माह के भीतर (30 सितंबर तक) अधिकृत संपरीक्षक (Auditor) से ऑडिट पूर्ण कराना अनिवार्य होगा।
  • अनिवार्य बही-खाते: रोकड़ बही, बैंक पासबुक, शेयर रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, मिनिट बुक और सदस्य पासबुक का नियमित संधारण आवश्यक है।

बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समितियों (M-VDCS) के Ideal Bylaws Download करे

यदि आप अपनी ग्राम पंचायत में नई बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समिति का गठन कर रहे हैं, पंजीयन आवेदन तैयार कर रहे हैं, या साधारण सभा में इन नियमों को अंगीकृत (Adopt) करना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक से M-Vdcs के Bylaws पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं:

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निष्कर्ष (Conclusion)

भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय और राजस्थान सहकारिता विभाग द्वारा जारी यह नई आदर्श उपविधियां ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम हैं। यह न केवल दुग्ध उत्पादकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाएंगी, बल्कि गांवों में आधुनिक व्यापार, डिजिटल बैंकिंग और रोजगार के नए आयाम भी स्थापित करेंगी।

यदि आप सहकारी आंदोलन से जुड़कर अपने गांव का सर्वांगीण विकास करना चाहते हैं, तो ऊपर दिए गए लिंक से बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समितियों (M-VDCS) के Ideal Bylaws Download करे, नियमों का पालन करें और अपनी समिति को आत्मनिर्भर बनाएं।

M-VDCS का पूरा नाम क्या है?

M-VDCS का पूर्ण रूप “Multipurpose Village Dairy Cooperative Society” (बहुउद्देशीय ग्राम डेयरी सहकारी समिति लि.) है।

क्या पुरानी डेयरी सहकारी समितियां भी इस नई आदर्श उपविधि को अपना सकती हैं?

हाँ, पूर्व से पंजीकृत डेयरी सहकारी समितियां अपनी साधारण सभा (General Body) में विशेष संकल्प पारित कर सहकारिता विभाग के अनुमोदन से इन बहुउद्देशीय उपविधियों को अंगीकृत कर सकती हैं।

 M-VDCS का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम शेयर राशि कितनी है?

सदस्य बनने के लिए न्यूनतम एक शेयर (मूल्य ₹100/-) खरीदना आवश्यक है तथा ₹10/- का अप्रतिदेय प्रवेश शुल्क जमा करना होता है।

क्या M-VDCS बैंक ऋण के लिए गारंटर बन सकती है?

नहीं, उपविधि संख्या 15.9 के अनुसार सहकारी समिति किसी भी व्यक्ति या समूह द्वारा वित्तीय संस्थानों से लिए जाने वाले ऋण के लिए गारंटर नहीं बनेगी।

M-VDCS में दुग्ध आपूर्ति का भुगतान किसानों को कितने दिनों में किया जाएगा?

उपविधि संख्या 15.8 के अनुसार, समिति द्वारा संकलित दूध का भुगतान अधिकतम 10 दिनों के भीतर सदस्य के बैंक खाते में प्रत्यक्ष अंतरण (Direct Bank Transfer) के माध्यम से किया जाएगा।

उपविधियों के किसी नियम पर विवाद होने पर अंतिम निर्णय किसका होगा?

आदर्श उपविधियों के किसी भी नियम या धारा की व्याख्या के संबंध में यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो रजिस्ट्रार, सहकारी सोसाइटियां, राजस्थान, जयपुर का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।

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